RohitRuminates
Wednesday, 25 November 2015
अहमियत
इससे भी ज्यादा क्या गिरना था उन्हें !
जिन्हें पलकों पे बिठाये रखा,
वे नज़रों से ही गिरते चले गए !!
( रोहित कुमार )
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